इन पांच कारणों से आप ज़रूर देखें ‘पद्मावत’

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For these five reasons - surely you see Padmavat - Udta Social Official

आखिरकार फिल्म पद्मावत रिलीज़ हो ही गई. फिल्म की प्री स्क्रीनिंग भी आज से शुरू हो जाएगी. 25 जनवरी को यह फिल्म आधिकारिक रूप से रिलीज़ हो रही है. करणी सेना और तमाम राजपूत संगठनों का विरोध जारी है. हालांकि करणी सेना के कुछ समर्थकों को ये फिल्म पसंद भी आई है. फिर भी फिल्म पर विवाद अभी थमा नहीं है. राजस्थान समेत कई राजपूत बहुल राज्यों में सिनेमा हॉल के डिस्ट्रीब्यूटर्स फिल्म को नहीं दिखा रहे हैं.

बुधवार को पद्मावत की दिल्ली में स्क्रीनिंग हुई. सिनेमाघर में सुरक्षा व्यवस्था के जैसे इंतज़ाम थे, उससे साफ़ था कि विवाद कितना बड़ा है. अब बात फिल्म की. फिल्म की शुरुआत में ही डिस्क्लेमर लगे हैं, जिनमें सबसे पहला यह है कि फिल्म पूरी तरह जायसी के पद्मावत पर आधारित है और हक़ीक़त से इसका कोई लेना-देना नहीं है.

एक और डिस्क्लेमर में कहा गया कि हम सती प्रथा का समर्थन नहीं करते.

पहला सीन अफ़गानिस्तान में बैठे अलाउद्दीन खिलजी के चाचा जलालुद्दीन ख़िलजी से शुरू होता है जो हिंद फ़तेह को लेकर अपने इरादे बता रहा है. जलालुद्दीन का किरदार एक्टर रज़ा मुराद ने निभाया है. तभी सीन में अलाउद्दीन खिलजी दाखिल होता है. रनवीर पहले ही सीन में अपने किरदार में जमे हुए दिखे. खिलजी का ‘सनकी’ किरदार उन्होंने ठीक से निभाया है.

खिलजी को लगता है कि दुनिया की हर नायाब चीज़ पर सिर्फ़ उसका हक़ है. इसी सोच के चलते वह पद्मावती तक पहुँचता है. इसमें पुल बना महारावल रत्न सिंह का राजगुरु. जो अपमान का बदला लेने के इरादे से खिलजी की शरण में है. आइए अब वो बातें जान लें जिनके चलते आपको पद्मावत देखनी चाहिए.

1. पहला तो रनवीर सिंह का किरदार अलाउद्दीन खिलजी. फिल्म खत्म हो जाती है पर आप इस किरदार में खो जाते हैं. जिम स्त्राभ जो खिलजी के ग़ुलाम बने हैं, उनकी एक्टिंग भी लाजवाब है. उनका बातचीत का लहज़ा और बॉडी लैंग्वेज लाजवाब है.

2. फिल्म में राजपूती आनबान और शान कूट-कूटकर भरी है. महारावल रतन सिंह का खिलजियों के सामने घुटने न टेकने की बात का महिमामंडन किया गया है. राजपूती उसूलों का पता फिल्म देखने पर चलता है.

3. संजय लीला भंसाली अपने सेट्स की भव्यता के लिए जाने जाते हैं. फिल्म में सिंघल राज्य, मेवाड़ और खिलजी का महल आपको उस वक्त में आसानी से ले जाता है. जौहर का दृश्य बेहद रोमांचक है. किस तरह क्षत्राणियां खिलजी का घमंड तोड़ती हैं, यह भी आपको अचरज में डाल देगा.

4. फिल्म में जबरदस्त एक्शन है. एक डायलॉग में कहा गया है कि जो सर धड़ से अलग होने के बाद भी दुश्मन पर वार करता रहे, वो है राजपूत. सेनापति गोरा और बादल की खिलजी से जंग और महारावल रतन सिंह के तीर लगने के बाद. ये दोनों सीन इस बात को साबित करते हैं.

5. रिचा शर्मा ने होली गीत से कमबैक किया है. बैकग्राउंड स्कोर पूरी तरह फिल्म से जोड़े रखता है. भंसाली की फिल्मों का संगीत भी उनकी यूएसपी है. हालांकि पद्मावत का संगीत देवदास, रासलीला और बाजीराव मस्तानी जैसी फिल्म्स को टक्कर देने वाला नहीं है.

 

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