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प्रिया कुमार ने 40 देशो में 800 से भी अधिक अंतर्राष्ट्रीय कॉर्पोरेट के साथ काम किया है और वो किताबों और वर्कशॉप के माध्यम से 2 मिलियन लोगों से मिल चुकी है।

ऐसा कारनामा कर दिखानेवाली वो भारत की पहली महिला स्पीकर है। वो भारत की अकेली ऐसी लेखिका हिया जिन्हें 14 अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार और 3 राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके है।

प्रिया कुमार का जन्म 4 मार्च 1973 को चंडीगढ़ (भारत) में हुआ। इनके पिता कीर्ति कुमार एंग्लो फेंच फार्मा कंपनी में चिकित्सक प्रतिनिधि थे और इनकी मा सोना कुमार भारतीय रिज़र्व बैंक में काम करती थी।

प्रिय कुमार ने मुंबई के ज्ञान केंद्र माध्यमिक विद्यालय में पढाई पूरी की।

प्रिय ने बहुत ही कम उम्र में लिखना शुरू कर दिया था। उन्हें किताबे पढना, निबंध लिखना, दोस्तों के होमवर्क पुरे करना बहुत अच्छा लगता था। वो निबंध लिखने की प्रतियोगिता में भाग लेती थी और इंक प्रतियोगिता में उन्हें कई बार पुरस्कार भी मिले।

प्रिया ने अलायन्स फ़्रन्कैस से फ्रेंच में सुपर डिप्लोमा किया है और मैक्स मुलर से जर्मन में डिप्लोमा किया है।

प्राथमिक पढाई पूरी करने के बाद प्रिया कुमार ने मिठीबाई कॉलेज में साइंस में पढाई की। एम. एम. के. कॉलेज में कॉमर्स की भी पढाई की। इन्होने मुंबई यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक पूर्ण की।

प्रिया ने मुंबई के एसव्हीकेएम के एनएमआईएमएस से मार्केटिंग और सेल्स में पीजी हासिल की है।

कॉलेज के 9 सालो में इन्होने ट्यूशन शिक्षिका बनकर फ्रेंच भाषा पढाई। उस समय इन्होने 1900 से भी ज्यादा छात्रों को पढाया।

1998 में इन्होने ट्यूशन शिक्षिका का काम छोड़ दिया और मोटिवेशनल स्पीकर का काम शुरू कर दिया। 24 की उम्र में वो देश की सबसे युवा मोटिवेशनल स्पीकर बन गयी थी। 35 की उम्र में इन्होने पहली किताब लिखी जिसका नाम था “आई ऍम अनादर यु” इस किताब की सभी ने बहुत प्रशंसा की और इसीकए साथ वो एक मोटिवेशनल स्पीकर के साथ साथ लेखिका भी बन गयी।

2006 में कुमार ने पेशेवर लिखना शुरू कर दिया। फाइनेंसियल एक्सप्रेस, इकोनॉमिक्स टाइम्स, मिडडे, बी पॉजिटिव, कम्पलीट वेल बीइंग, डीएनए, मिंट, दैनिक भास्कर और अन्य कई अखबारों में प्रिया कुमार नियमित रूप से लिखती है।

डॉक्टर निरंजन पटेल ने प्रिया कुमार को मार्गदर्शन किया है। इन्होने युवाओ को तम्बाकू और अल्कोहल की लत छोड़ने के लिए वर्कशॉप लिए है। प्रिया ने उनके लिए ख़ुद के पैसे से बहुत कार्यक्रम आयोजित किए थे।

जब डॉक्टर पटेल 1998 में गुजार गए तब उनके कुछ वर्कशॉप अधूरे रह गए थे, तो उन सात वर्कशॉप को पूरा करने का काम प्रिया कुमार ने किया था। वह इनके स्पीकर के करियर की शुरुवात थी। तो इस तरह कुमार ने तम्बाकू और अल्कोहल से शुरुवात करके मोटिवेशनल विषयो पे ध्यान देना शुरू किया।

कुमार इस बात में विश्वास रखती है की, “आप लोगों को बदल नहीं सकते, लेकिन जिंदगी में खुश रहने के लिए कुछ बदलाव लाने के लिए आप लोगों को प्रेरित कर सकते हो।”

1998 में प्रिया देश की सबसे युवा मोटिवेशनल स्पीकर बन गयी थी तब इनकी उम्र केवल 24 साल थी। इन्होने पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय कॉर्पोरेट के साथ वर्कशॉप आयोजित किए। कॉर्पोरेट ट्रेनिंग, लीडरशिप, मोटिवेशन, टीम बिल्डिंग और पर्सनल ब्रेकथ्रू यह इनके वर्कशॉप के खास विषय है।

वो अपने वर्कशॉप में लोगों से कई सारी चीजे करवाती है जैसे की आग पे चलना, काचपे चलना, स्टील के बार को झुकाना और बोर्ड को तोडना। यह सब चीजे करवाके वो लोगों के शरीर और मन को मजबूत बनवाने की कोशिश करती है, जिसके की लोग ख़ुद की जिंदगी में अच्छे मुकाम तक पहुच पाए।

वो अपने हर कार्यक्रम में लोगों को अनुभव के आधार पर सिखाती है जिससे की लोग ना केवल लेक्चर या थेरी बल्कि जिंदगी के अनुभव से सिख सके। प्रिया कुमार जिस तरह से लिखती है उसकी तुलना पाउलो कोएल्हो और दीपक चोपड़ा से की जाती है।

शुरुवात के दिनों में कॉर्पोरेट वर्कशॉप करने के साथ साथ वो इंडो अमेरिका सोसाइटी में जाती थी। वहा पर प्रिया कुमार ने युवा के लिए दो साल तक व्यक्तित्त्व विकास पर वर्कशॉप लिए।

प्रिया कुमार को मिले हुए कुछ पुरस्कार – Priya Kumar Awards

  • 2010 में प्रिया कुमार वीमेन लीडर इन इंडिया अवार्ड के लेखक की श्रेणी में 2 नंबर पे थी। इन पुरस्कारों को आई ग्रुप ने दिल्ली में दिया था। प्रिया कुमार को सिटीजन ऑफ़ द डिकेड का सम्मान कोचीन में रोटरी इंटरनेशनल द्वारा दिया गया।
  • 2010 में ‘लाइसेंस टू लिव’ को वोडाफोन क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड के लिए नामित किया गया था।
  • 2012 में ‘लाइसेंस टू लिव’ को एरिक होफर के अध्यात्मिक किताबों की श्रेणी में पाच सम्मान मिले।
  • 2013 में प्रिया कुमार के ‘आई ऍम अनादर यु’ किताब को लिविंग नाउ बुक अवार्ड में रजत पदक प्राप्त हुआ।
  • 2014 में ‘आई ऍम अनादर यु’ को एरिक होफर ग्रैंड प्राइज अवार्ड के लिए अंतिम सूचि में शामिल किया गया था।
  • मोंटैगने मैडल के लिए ‘आई ऍम अनादर यु’ फाइनलिस्ट था।
  • ‘आई ऍम अनादर यु’ को होरिजन अवार्ड भी मिल चूका है।
  • ‘आई ऍम अनादर यु’ को एरिक होफर अवार्ड मिला है।
  • अमेरिका के लिविंग नाउ बुक अवार्ड में ‘आई ऍम अनादर यु’ को एवरग्रीन मैडल प्राप्त हुआ।
  • 2015 में 14 वे वार्षिक अमेरिका बेस्ट बुक अवार्ड में अध्यात्मिक प्रेरणा की श्रेणी में ‘आई विल गो विथ यु’ फाइनलिस्ट था।
  • 2015 में अमेरिका के एरिक होफर इंटरनेशनल बुक अवार्ड में ‘ड्रीम, डेयर, डिलीवर’ फाइनलिस्ट की सूचि में था।
  • 2016 में ‘द कालिंग’ को अमेरिका में द बुक एक्सीलेंस अवार्ड मिला।
  • 2017 में ‘द कालिंग’ एरिक होफर अवार्ड के दा विन विंसी ऑय का फाइनलिस्ट था।
  • 2017 में ‘द कालिंग’ को अध्यात्मिक श्रेणी में द एरिक होफर इंटरनेशनल बुक अवार्ड के लिए फाइनलिस्ट किया गया था।
  • प्रिया कुमार को जुलाई 2017 तक बहुत सारे राष्ट्रीय पुरस्कार और 13 अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके है।
  • 2017 में प्रिया कुमार को सर्वश्रेष्ठ प्रेरनादायी लेखिका के लिए स्पीकिंग ट्री गुड कर्मा अवार्ड मिल चूका है।

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