भारतीय फ़िल्म जगत में मशहूर खलनायक अमरीश पूरी बायोग्राफी।

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अमरीश पूरी का जन्म 22 जून 1932 में नवनशहर में हुआ था। उनके पिता का नाम लालानिहाल चाँद और मा का नाम वेद कौर था। अमरीश पूरी ने डिग्री की पढाई हिमाचल प्रदेश (भारत) के बी। एम।कॉलेज से पूरी की। उन्होंने 1967 से 2005 के दौरान 400 से भी अधिक फिल्मो में काम किया है। उन्होंने 5 जनवरी 1957 को उर्मिला दिवेकर से वडाला के श्री कृष्णा मंदिर में शादी की थी।

अमरीश को टोपी इकट्टा करने का बड़ा शौक था। वो जब भी विदेश घुमने जाते तो वो वहासे जरुर एक या दो टोपी साथ में लाते थे। उन्होंने पूरी दुनिया से लगभग 200 से भी अधिक टोपिया जमा की है। अमरीश बहुत धार्मिक किस्म के इन्सान थे और वो भगवान शिव के बड़े भक्त थे।

अमरीश पूरी का करियर – Amrish Puri Career

अमरीश पूरी ने 1967 से 2005 के दौरान 400 से भी ज्यादा फिल्मो में काम किया है। वो सबसे कामयाब खलनायको में से एक खलनायक है। उनके दोनों बड़े भाई मदन पूरी और चमन पूरी फिल्मो में जानेमाने खलनायक थे। उन दोनों को देखकर ही अमरीश पूरी मुंबई आये थे।

वह उनके पहले ही स्क्रीन टेस्ट में ही फेल हो गए थे इसलिए उन्होंने श्रम और रोजगार मंत्रालय के राज्य कर्मचारी बिमा निगम में नौकरी करना शुरू कर दिया था। नौकरी करने के साथ साथ वो पृथ्वी थिएटर में सत्यदेव दुबे के नाटक में भी काम किया करते थे।

आखिरकार वो एक अच्छे स्टेज अभिनेता बन ही गए थे और उन्हें 1979 मे संगीत नाटक अकादेमी अवार्ड मिला था। उनके इस कामयाबी के बाद उन्हें टेलीविज़न में काम करने का मौका मिला और आखिरकार जब वो 40 साल के हो चुके थे तो उन्हें फिल्मो में भी काम करने का मौका मिला।

अमरीश पूरी ने हिंदी, कन्नडा, मराठी, तमिल, मलयालम, तेलुगु और पंजाबी फिल्मो में भी काम है। बहुत सारी प्रादेशिक भाषा में कामयाब होने के अलावा भी उन्हें हिंदी फिल्मो में भी प्रसिद्धी मिली।

1970 के दशक में पूरी ने बहुत सारे सहायक अभिनेता के किरदार निभाए है खासकर मुख्य खलनायक के सहायक के रूप में ही वो ज्यादातर देखने को मिले।

1980 की हिट फ़िल्म “हम पाच” में खलनायक के रूप में नजर आये थे। उस फ़िल्म से उनके करियर को बेहतरीन शुरुवात मिली। उस फ़िल्म के कारण वो सबकी नजरो में आ गए थे। उस फ़िल्म के बाद उन्हें सारे खलनायक के किरदार मिलने की शुरुवात हो गयी थी।

1982 में रिलीज़ में हुई सुभाष घई की सुपर हिट फ़िल्म “विधाता” में उन्होंने जगावर चौधरी का किरदार निभाया था। उस फ़िल्म में उन्होंने खलनायक की भूमिका निभाई थी। उसी साल उन्होंने “शक्ति” फ़िल्म में जेके खलनायक की भूमिका की थी। वो फ़िल्म लोगों को बेहद पसंद आयी थी उसमे दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन एक साथ नजर आये थे।

उसके अगलें ही साल 1983 में सुभाष घई की सुपरहिट फ़िल्म “हीरो” आयी थी। उसमे उन्होंने खलनायक पाशा का अभिनय किया था। बाद में तो अमरीश पूरी सुभाष घई की फिल्मो में बार बार नजर आये।

1980 और 1990 के दौरान उन्होंने मुख्य खलनायक के किरदार ही निभाए थे। उस दौरान ऐसी कोई भी फ़िल्म नहीं थी की जिनमे अमरीश पूरी बतौर खलनायक के रूप में देखने को ना मिले हो। उनके दिखने का अलग अंदाज और उनकी जबरदस्त आवाज उनकी पहचान बन चुकी है जो उन्हें दुसरे खलनायको से अलग बनाती है।

अंतर्राष्ट्रीय स्थर पर भी उनका नाम बहुत मशहूर हो चूका है। रिचर्ड अटेनबोरोग की फ़िल्म गाँधी (1982) में वो खान की भूमिका में नजर आये थे और स्टेवन स्पीलबर्ग की फ़िल्म इंडिआना जोंस में मोला रामा की किरदार आजतक सब को याद है।

टेम्पल ऑफ़ डूम (1984) फ़िल्म में भी वो अभिनय करते हुए दिखाई दिए थे। उस फ़िल्म में जबरदस्त दिखने के लिए और खतरनाक खलनायक दिखने के लिए उन्होंने अपने सर के सारे बाल काट डाले थे, जिसके कारण उन्हें एक गंजे खलनायक का रूप मिला था।

पूरी और स्पीलबर्ग दोनों के बिच बहुत गहरी दोस्ती थी। एक बार अमरीश पूरी के बारे में एक साक्षत्कार में उन्होंने बताया था की,

“अमरीश पूरी जैसा खलनायक दुनिया में ना कभी हुआ है और ना कभी होगा।”

खलनायक के किरदार में उनका सबसे यादगार किरदार कोई रहा है तो वो केवल मिस्टर इंडिया फ़िल्म का “मोगाम्बो।” मोगाम्बो का किरदार आज भी करोडो लोगों के दिल में बसता है।

उनके और भी खलनायक के यादगार किरदार है जो की विधाता में “जगावर”, मेरी जंग में “ठकराल”, त्रिदेव में भुजंग, घायल में बलवंत राय, दामिनी में बारिस्टर चड्ढा और करण अर्जुन फ़िल्म में ठाकुर दुर्जन सिंह। वो चाची 420 में कॉमेडी किरदार निभाते हुए नजर आये थे।

उस फ़िल्म में उन्होंने कमल हसन के साथ मिलकर काम किया था। उनके इस किरदार की सभीने सराहना की थी।

1990 से उन्होंने बहुत फिल्मो में कई सारे अच्छे सहायक अभिनेता के रूप में काम किया। उनके अच्छे किरदारों में दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे, फूल और काटे, गर्दिश, परदेस, विरासत, घातक और चाइना गेट। उन्हें मेरी जंग और विरासत फ़िल्म के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला था।

अमरीश पूरी की मृत्यु – Amrish Puri Death

अमरीश पूरी 12 जनवरी 2005 को मुंबई (महाराष्ट्र) में मृत्यु हुयी। तब वो 72 साल के थे। उनकी मृत्यु दिमागी बीमारी हेमोरेज के कारण हुई थी।

अमरीश पूरी को मिले हुए पुरस्कार – Amrish Puri Award

  • 1968 : महाराष्ट्र राज्य ड्रामा प्रतियोगिता
  • 1979 : थिएटर के लिए संगीत नाटक अकादेमी अवार्ड
  • 1986 : मेरी जंग के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार
  • 1991 : महाराष्ट्र राज्य गौरव पुरस्कार
  • 1994 : सूरज का सातवा घोडा के लिए सिडनी फ़िल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार
  • 1994 : सूरज का सातवा घोडा के लिए सिंगापोर अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार
  • 1997 : घातक फ़िल्म के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार
  • 1997 : घातक फ़िल्म के लिए स्टार स्क्रीन सहायक अभिनेता पुरस्कार
  • 1998 : विरासत फ़िल्म के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार
  • 1998 : विरासत फ़िल्म के लिए स्टार स्क्रीन सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार
  • 2000 : सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए कलाकार पुरस्कार

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