फिल्म देखने से पहले जान लें की कोण है “पद्मावती”, 16 हज़ार दसियों के साथ जौहर करने पर क्यों हुई थीं मज़बूर?

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who was padmavati - Udta Social Official

दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘पद्मावत’ काफी विवाद के बाद अब रिलीज के लिए तैयार है। फिल्म के ट्रेलर के साथ तीन प्रोमो रिलीज हो चुके हैं। प्रोमो से ही पता चल रहा है कि फिल्म जबरदस्त हिट होने वाली है। भंसाली की यह फिल्म रानी पद्मिनी और राजपूतों के लिए सच्ची श्रद्धांजली साबित हो सकती है।

फिल्म में दीपिका के अलावा शाहिद कपूर और रणवीर सिंह भी मुख्य भूमिका में होंगे। शाहिद, रावल रतन सिंह और रणवीर, अलाउद्दीन खिलजी के रोल में दिखाई देंगे। दोनों ने फिल्म में लाजवाब काम किया है। ‘पद्मावत’ 25 जनवरी को रिलीज होने के लिए तैयार है। इस फिल्म के ‌लिए अक्षय कुमार ने भी अपनी फिल्म ‘पैडमैन’ की रिलीज डेट आगे बढ़ा ली है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फिल्म को सभी राज्यों में रिलीज करने की इजाजत दे दी है। लेकिन गुजरात में अभी भी फिल्म बैन है। दर्शक लंबे समय से इस फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। इससे पहले आप फिल्म देखें, हम आपको रानी पद्मिनी का वो इतिहास बताने जा रहे जिसे शायद आप नहीं जानते होंगे। जानें रानी पद्मिनी ने क्यों जौहर कर लिया था। “Padmavati has never feared anything in her life” ?? 6 DAYS TO GO!!! Are you ready for Padmaavat? pic.twitter.com/w2pfu6nO7r — Deepika Malaysia FC (@TeamDeepikaMY_) January 19, 2018

रानी पद्मिनी पद्मावत की रहने वाली थीं। उन पर कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने एक कविता भी लिखी है। कहा जाता है कि रानी पद्मिनी अपनी खूबसूरती के लिए पूरे भारत में मशहूर थीं। लेकिन रानी पद्मिनी के अस्तित्व को लेकर इतिहास में कोई दस्तावेज मौजूद नही है। हालांकि चित्तौड़गढ़ में रानी पद्मावती की छाप नजर आती है। And here is yet another latest classic promo of #Padmaavat . This features @RanveerOfficial aka Alauddin Khilji and gives us the glimpse of Ranveer’s power-packed performance that we are going to experience in this magnum opus from 25th January onwards worldwide. pic.twitter.com/GjeCMhlUsD — Rahul Raut (@Rahulrautwrites) January 19, 2018

रानी पद्मिनी की मां का नाम चंपावती और पिता का नाम गंधर्वसेन था। उनके पास एक बोलने वाला तोता हीरामणि भी था। पद्मिनी के विवाह के लिए उनके पिता ने स्वयंवर का आयोजन किया था। इसमें हिन्दू-राजपूत राजाओ को आमंत्रित किया गया था। एक छोटे से राज्य के राजा मलखान सिंह भी उनसे विवाह करने के लिये पधारे थे। चित्तौड़गढ़ के राजा रावल रतन सिंह रानी नागमती के होते हुए भी स्वयंवर में आए थे। Today is the best day indeed! Here comes the 2nd official dialogue promo of #Padmaavat where @shahidkapoor and @deepikapadukone ‘s love is the highlight. https://t.co/4DRKN72R22 — Rahul Raut (@Rahulrautwrites) January 19, 2018

उन्होंने मलखान सिंह को पराजित कर पद्मिनी से विवाह कर लिया था।  स्वयंवर के बाद रतन सिंह अपनी सुंदर रानी पद्मिनी के साथ चित्तौड़ लौट आए। राजा रावल रतन सिंह एक बहादुर और साहसी योद्धा थे। एक अच्छे पति के साथ बेहतर शासक भी थे। इसके अलावा रतन सिंह को कला में भी काफी रुचि थी। उनके दरबार में काफी बुद्धिमान लोग थे, उनमें से एक संगीतकार राघव चेतन भी था।

राघव चेतन एक जादूगर भी थे। वे अपनी इस कला का उपयोग शत्रुओं को चकमा देने के लिए आपातकालीन समय में ही करते थे। लेकिन राघव सिंह के कारनामे सभी के सामने आने के बाद राजा बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने उसे अपने राज्य से निकाले जाने का भी आदेश दिया था। उनके चेहरे को काला कर गधे पर बैठाकर राज्य में घुमाने का आदेश भी दिया था। इस घटना के बाद वो राजा के कट्टर दुश्मनों में शामिल हो गए थे।

इसके बाद राघव चेतन दिल्ली चले गए। वहां सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी को चित्तौड़ पर आक्रमण करने के लिए मनाने की कोशिश करने लगे। राघव चेतन ने सुल्तान से कहा कि एक साधारण संगीतकार हैं और जब राघव चेतन ने अलाउद्दीन को रानी पद्मावती की सुन्दरता के बारे में बताया तो अलाउद्दीन मन ही मन रानी पद्मावती को चाहने लगा।   उन्होंने राजा रतन सिंह के लिए यह सन्देश भेजा कि वो रानी पद्मावती को बहन मानते हैं और उनसे मिलना चाहते हैं।

रानी पद्मावती ने अलाउद्दीन को उनके प्रतिबिम्ब को आईने में देखने की मंजूरी दे दी थी। अलाउद्दीन ने भी निर्णय लिया कि वो रानी पद्मावती को किसी भी हाल में हासिल कर लेंगे। इस दौरान खिलजी ने छल से रतन सिंह को अगवा कर लिया। लेकिन किसी तरह रतन सिंह खुद को छुड़ाकर वहां से भाग गए। जब यह खबर खिलजी को मिली तो उसने चित्तौड़ पर आक्रमण करने का निर्णय लिया। ऐसा पाते ही राजा रतन सिंह ने सभी राजपूतों को आदेश दिया कि सभी द्वार खोलकर खिलजी की सेना का सामना करे।

रानी पद्मावती ने देखा कि उनकी सेना का सामना विशाल सेना से हो रहा है तो उन्होंने चित्तौड़ की सभी महिलाओं के साथ जौहर करने का फैसला लिया। उनके अनुसार दुश्मनों के हाथ लंगने से बेहतर जौहर करना ही था। जौहर में शाही महिलाएं दु‌श्मन से बचने के लिए एक विशाल अग्निकुंड में खुद को न्योछावर कर देती हैं। इस तरह खुद का जौहर कर उन्होंने आत्महत्या कर दी थी। इस विनाशकारी विजय के बाद खिलजी की सेना केवल राख और जले हुए शरीर को देखने के लिए किले में आ सकी थी।

 

Source: amarujala.com

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