बच्चों में होनेवाली आँख की समस्याएँ

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    Eye Conditions That Go Unnoticed In Children - Udta Social Official

    आंखें, हालांकि शरीर का बहुत छोटा सा अंग है, मगर सबसे संवेदनशील और हमारे शरीर में सबसे जटिल अंग है। आँखों के बिना, हम चीजों को देखने में असमर्थ होंगे, गहराई, दूरी ,ठोकरें और बहुत सी बाते को समझने में अक्षम होंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम अपनी और बच्चों की आँखों की अच्छे से देखभाल करें। बदलते माहौल और जोखिम के कारण , दृष्टि की समस्या बच्चों में भी बहुत आम हो चुकी है।

    बच्चे कीआँख की यह समस्याएँ हो सकती हैं:

    अपवर्तक त्रुटियों (दृष्टि दोष ) – बच्चे अगर दूरदृष्टि की शिकायत करते है, और दूर या निकट की वस्तुओं को देखने में असमर्थ है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करें।

     

    बच्चे को अपवर्तक त्रुटियों के निम्नलिखित प्रकार की समस्या हो सकती है –

    निकट दृष्टि दोष या मयोपिया – इसमें बच्चे को पास की वस्तु स्पष्ट रूप से दिखती हैं, लेकिन दूर की वस्तु धुंधली दिखाई देती हैं।

    हाइपरओपिया – इसमें बच्चे दूर की वस्तु को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं, लेकिन निकट की वस्तु नही देख पाते हैं।

    दृष्टिवैषम्य ऑस्टिगमैटिस्म – इसमें बच्चों को दूर और पास दोनों की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखने में कठिनाई होती है।

    इस सब दोषों का इलाज़ चश्मे या कॉन्टेक्ट लेंस के साथ किया जा सकता है और दृष्टि में सुधार लाया जा सकता है।

     

    विषम आंखें या अस्य्म्मेत्रिकल – अगर बच्चे की दोनों आंखों या पलकों के आकार में अंतर है, तो बच्चा विषम आंखों वाला हो सकता है। इसका इलाज सर्जरी से किया जा सकता है लेकिन अगर अनुपचारित छोड़ दिया जाता है तो ये अन्य दृष्टि समस्याओं को जन्म दे सकता है। आलसी आंख (lazy eye) (मंददृष्टि) से हुई कम दृष्टि का सुधार-चश्मे या कॉन्टेक्ट लेंस द्वारा भी नहीं किया जा सकता है। यह हमेशा एक आंख को ही प्रभावित करता है, लेकिन कभी-कभी दोनों आंखों को प्रभावित भी कर सकता है।

    भैंगापन (Squint/Strabismus) – बच्चा किसी वस्तु को देख रहा है और एक आँख को बंद करके या एक तरफ सिर झुका कर देखता है तो वह भेंगा हो सकता है। इस हालत में, एक आंख सामने देखती है और दूसरी आँख बाहर, ऊपर की तरफ, या नीचे की ओर देखती है । यह एक सामान्य स्थिति है जो 20 में से एक बच्चे को प्रभावित करती है , आम तौर पर यह पांच साल से पहले विकसित होती है। भेंगापन आगे चलकर दृष्टि को धुंधला कर सकता है।

    एलर्जी नेत्रश्लेष्मलाशोथ (कंजक्टिवाइटिस ) – बच्चे अगर आंखों को अधिक बार चुभन या अन्य कारण की वजह से लगातार मलते हैं तो यह कंजक्टिवाइटिस हो सकती है। इसका कारण आँख में पराग, धूल, या फफूंदी हो सकता है। यह मौसमी भी हो सकता है। इसके इलाज़ के लिए एंटी -हिस्टामाइन आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    कॉर्नियल निशान – कुछ बच्चों में दृष्टि या पूर्ण अंधेपन का कारण कार्निया पर धब्बा भी हो सकता है। कॉर्निया पर निशान खरोंच, चोट, कोई बीमारी या जलने के कारण विकसित हो सकता है। अगर धब्बा गहरा है और दृष्टि को प्रभावित कर रहा है, तो कार्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है।

    जन्मजात कांचबिंदु (Glaucoma)- बच्चे को हो सकता है की कॉर्निया में प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, बड़ी आँखें, और धुंधलापन की समस्या हो। जन्मजात कांचबिंदु का पता पहले वर्ष के दौरान ही चल जाता है। यह एक दुर्लभ स्थिति होती है जो विरासत में मिल सकती है। यह जन्म से पहले आंख के अनुचित विकास के कारण होता है। यह ऑप्टिक तंत्रिका को क्षति पहुँचाने का कारण हो सकती है जिससे आंखों में दबाव बढ़ सकता है। इसके सुधार के लिए सर्जरी और दवा का इस्तेमाल किया जाता है।

    एल्बीनिज़्म – यह असाधारण दिक्कत होती है जिसमें गोरी त्वचा और बाल भूरे होते हैं , और आंखों की पुतलियां हिलती रहती हैं। इसमें बच्चे को आमतौर पर फोटोफोबिया और धुंधला दिखता है और अक्सर इसपर ध्यान नहीं जाता है।

    प्रकाश की असहनीयता या फोटोफोबिया – बच्चे की आंखों में असुविधा होती है जब भी वो प्रकाश की ओर देखता है या कम रौशनी में देखता है, इस परेशानी को फोटोफोबिया कहते हैं । कई बार आंखों के अंदर सूजन, कार्निया घर्षण या अल्सर, लेंस के अत्यधिक उपयोग से भी फोटोफोबिया हो सकता है। ऐसे में बच्चे को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए , अगर बच्चे को प्रकाश की वजह से आंखों में अत्यधिक दर्द या जलन होती है।

    न्यूरोब्लास्टोमा – यह एक दुर्लभ कैंसर है जो कि दस साल से भी कम उम्र के बच्चों में होता है। इसमें बच्चे को “आँख का घूमना, पैरों के लड़खड़ाने की समस्या” के साथ मांसपेशियों में ऐंठन भी हो सकती है।

     

    Source: modasta.com

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